Sunday, April 28, 2013

श्रीभगवतीस्तोत्रम्

  • जय भगवती देवी नमो वरदे , जय पापविनाशिनी बहु फलदे ॥ 
  • जय शुम्भ निशुम्भ कपाल धरे ,जय  प्रणमामी तु विनिशर्तिहरे ॥ 
  • जय चन्द्र्दिवाकर नेत्र धरे ,जय पावक भूशिन्वक्त्र धरे ॥ 
  • जय भेरवदेह निलीनपरे  ,जय अन्धक्दैत्य  विशोषकरे   ॥ 
  • जय महिष विमर्दिनी शूलकरे ,जय लोक समस्त्क पाप हरे ॥ 
  • जय देवी पितामह विष्णुनते ,जय भाष्कर शक्र शिरोअवनते ॥ 
  • जय षन्मुख सायुध ईश्नते ,जय सागर गामिनी शम्भुनते ॥ 
  • जय दुःख दरिद्र विनाश्कारे ,जय पुत्र कलत्र विबुद्धिकरे ॥ 
  • जय देवी समस्त शरीर धरे ,जय नाक विदर्शिनी दुःख हरे ॥ 
  • जय वांछित दायिनी सिद्धि वरे ,जय व्याद्विनाशिनी मोक्ष करे ॥ 
श्री भगवती की स्तुति का नित्य प्रति पाठ करने से मानसिक शांति प्राप्त होती है और माँ की कृपा बनी रहती है .

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