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Tuesday, December 31, 2013
Sunday, December 29, 2013
bhajan
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बेला अमृत गया,आलसी सो रहा बन अभागा ,साथी सारे जगे तू न जागा ॥
१. कर्म उत्तम से नर तन ये पाया,आलसी बन के हीरा गँवाया ,
होवे उलटी मति ,करके अपनी छति ,विष में पागा ,साथी सारे जगे तू न जागा ॥
२. झोलियाँ भर रहे भाग वाले ,लाखों पतिको ने जीवन ,
रंक राजा बने, भक्ति रस में पगे ,कष्ट भागा ,साथी सारे जगे तू न जागा ॥
३. धर्म -वेदों को न देखा भाला, बेला अमृत गया न सम्भाला ,
सौदा घाटे का कर,हाथ माथे पे धर रोने लागा,साथी सारे जगे तू न जागा ॥
४. ब्रह्म -व्यापक न तूने विचारा ,सर से ऋषियों का ऋण न उतारा ,
हंस का रूप था,गंदा पानी पिया बन के कागा ,साथी सारी जगे तू न जागा ॥
Wednesday, December 18, 2013
bhajan
आना पवन कुमार हमारे घर कीर्तन में ----------
१. आप भी आना संग राम जी को लाना ,
लाना जनक दुलारी हमारे घर कीर्तन मे --------आना पवन कुमार ---
२. भारत जी को लक्ष्मण जी को ,
लाना राज दरबार ,हमारे घर कीर्तन में ---------आना पवन कुमार
३. कृष्ण जी को लाना ,राधा जी को लाना ,
लाना सब परिवार, हमारे घर कीर्तन में ----------आना पवन कुमार
४. शंकर जी को लाना ,नारद जी को लाना ,
डमरू वीणा बजाना ,हमारे घर कीर्तन में ----------आना पवन कुमार
५. सुमति को लाना ,कुमति को हटाना ,
करना बेडा पार ,हमारे घर कीर्तन में ------आना पवन कुमार
६. आप भी आना , संग में भैरों जी को लाना ,
लाना प्रेत राज सरकार, हमारे घर कीर्तन में --------------आना पवन कुमार
७. हम भक्तों पर कृपा करके ,
सुन लो नाथ पुकार, हमारे घर कीर्तन में --------आना पवन कुमार
Monday, December 9, 2013
bhajan
जीवन के आधार हमारे राधेश्याम ,भज लो बारम्बार हमारे राधेश्याम ,
१. चल के फिर ,के रोके-गाके ,दुःख में सुख में मन समझाकर ,
कहो पुकार -पुकार हमारे राधेश्याम ॥
२. जय योगेश्वर ,कृष्ण मुरारी ,भक्ति भाव में लीलाधारी ,
करते भव से पार ,हमारे राधेश्याम ॥
३. ह्रदय रमन करुणा के सागर, अनुपम अति सुंदर नटवर नागर ,
स्वयं प्रेम आगार ,हमारे राधेश्याम ॥
४. कुछ ही दिन का यह जीवन है ,प्रभु ध्यान ही सुखमय धन है ,
पथिक मुक्ति दातार ,हमारे राधेश्याम ॥
Wednesday, November 27, 2013
utpanna ekadashi
पूजा -पाठ हिदुस्तानी घरों की परम्परा है प्रतिदिन के व्रत -त्यौहार दिनचर्या में उसी तरह से शामिल हैं जिस तरह से भोजन। एकादशी ,तेरस ,पूर्णिमा,आदि के व्रत की परंपरा है ,कहा जाता है एकादशी के व्रत के रखने से विष्णु जी की कृपा के साथ ही मोक्ष की भी प्राप्ति होती है। आने वाली २९ नवम्बर २०१३ को उत्पन्न एकादशी पड़ रही है और जिसकी कथा और पूजा इस प्रकार है --------
इस व्रत को करने से मनुष्य का जीवन शुख शांति से व्यतीत होता है ,इस दिन परोपकारिणी देवी का जन्म हुआ था और इसीलिए इस दिन पूजन करके भगवद भजन करना चाहिए।
कथा-----
सतयुग में मुर नामक दानव ने देवताओं पर विजय पाकर इंद्र को पदस्थ कर दिया ,देवता लोग अप्रसन्न होकर भगवान् शंकर के पास पहुंचे ,शिवजी के आदेश से देवता विष्णु जी के पास पहुचे। विष्णु जी ने बाणों से राक्षसों का वध तो कर दिया मगर मुर न मरा। दानव मुर किसी देवता के वरदान से अजेय था। विष्णु जी ने मुर से लड़ना छोड़कर बद्रिकाश्रम की गुफा में आराम करने चले गए। मुर ने भी उनका पीछा न छोड़ा और गुफा में जाकर उन्हें मारना चाहा ,पर उसी समय विष्णु जी के शरीर से एक सुंदर कन्या ने जन्म लिया ,जिसने मुर का वध कर दिया।
उस कन्या ने विष्णु जी को बताया -:मैं आपके अंग से उत्पन्न हुई एक शक्ति हूँ। "विष्णु जी प्रसन्न हुए और उन्होंने वरदान दिया कि तुम संसार के माया जाल में उलझे तथा मोहवश मुझे भूले हुए प्राणियों को मेरे पास लाने में सक्षम होगी और तेरी आराधना करने वाले प्राणी आजीवन सुखी रहेंगे।
क्योंकि वो कन्या एकादशी के दिन पैदा हुई थी अतः इस एकादशी का नाम उत्पन्न पड़ा ,और इस एकादशी को करने वाले प्राणी को विष्णु लोक में वास मिलता है।
Sunday, November 24, 2013
bhajan
राम नाम के साबुन से मन का मैल छुड़ाएगा ,निर्मल मन के दर्पण में वो राम का दर्शन पायेगा॥
१. हर प्राणी में राम बसे हैं ,पल भर तुमसे दूर नहीं -२ देख सके न जिन आँखों से उन आँखों में नूर नहीं ॥
देखेगा मन मंदिर में वो प्रेम की जोत जलायेगा -निर्मल मन -------
२. नर शरीर अनमोल है ,प्राणी हरि कृपा से पाया है -२ झूठे जग प्रपंच में पड़कर क्यों हरि को बिसराया है ॥
समय हाथ से निकल गया तो फिर धुन -धुन पछतायेगा --निर्मल मन -----
३.साधन तेरा कच्चा है जब तक प्रभु पर विशवास नहीं -२ मंजिल को पाना है क्या जब दीपक में प्रकाश नहीं ॥
राम नाम एक मन्त्र यही प्रिय साथ तुम्हारे जाना है -निर्मल मन------
Friday, November 22, 2013
bhajan
मुखड़ा ---
बन के लिलहरी राधा को चलने चले ,भेष उनका बनाना गजब हो गया ,जुल्म ढाती थी जो चोटियां श्याम की ,मन सेंदुरा भराना गजब हो गया। …।
अंतरा ---
१. आसमां पर सितारे लरजने लगे ,चाँद बदली में मूहं को छुपाने लगा -----२
चांदनी रात में बेखदर बाम पर बेनकाब उनका आना गजब हो गया -----बन के लिलहरी ----
२. बिछड़ी जिस दम मिली थी नज़र से नज़र ,जान राधा गयीं छल किया आनकर ----२
बहुत शर्मिंदा थीं राधिका उस घड़ी ,श्याम का मुस्कुराना गजब हो गया --- बन के लिलहरी ----
३. हाथ गालों पे जिस दम धारा श्याम ने ,हाथ झलकार राधा ये कहने लगीं ---२
सच बता दे अरे छलिया तू कौन है ,तुझसे नज़रें मिलाना गजब हो गया ------बन के लिलहरी----
४. तेरा प्रेमी हूँ अच्छी तरह जान ले ,मैं हूँ छलिया किशन मुझको पहचान ------२
तेरी खातिर मैं राधा जनाना बना ,प्रेम तुमसे बढ़ाना गजब हो गया --बन के लिलहरी -----
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