Thursday, March 13, 2014

होली पर्व

होली का पर्व हिदू धर्म में बहुत ही महत्व पूर्ण है ,फाल्गुन माह की पूर्णिमा को होलिका दहन होता है तत्पचात एकम को रंग खेला जाता है ,फागुन शुक्ल अष्टमी से पूर्णिमा तक आठ दिन होलाष्टक मनाया जाता है ,पुराणों के अनुसार ऐसी भी मान्यता है कि जब भगवान शंकर ने अपनी क्रोधाग्नि से कामदेव को भस्म कर दिया था, तभी से होली का प्रचलन हु‌आ।परन्तु सर्वाधिक प्रसिद्ध कथा भक्त प्रहलाद की है । 

कथा इस प्रकार है --

        जिस समय हिरणकश्यप अपने पुत्र की प्रभु  भक्ति से खिन्न रहता था और उसे तरह-तारह से प्रताड़ित करके मरवाने की कोशिश में असफल होने के बाद अपनी बहन को बुलवाया ,हिरण्यकश्यप कि बहन को  अग्नि का वरदान था और उसे एक दुशाला मिली थी जिसे पहन कर यदि अग्नि में भी बैठ जाये तो भी भस्म नहीं होगा ,उसका नाम होलिका था ,तब उसने भाई हिरण्यकश्यप से कहा मैं पुत्र प्रहलाद को लेकर अग्नि में बैठ जाउंगी ताकि वह जलकर भस्म हो जाए , भगवान् की कृपा से व दुशाला उड़ कर भक्त प्रह्लाद के ऊपर आ गिरी और होलिका भस्म हो गयी और तभी से होली का त्यौहार मनाया जाने लगा । 


होलिका दहन में गोबर के बड़कुल्ले ,गेहूं की बाली ,और मिष्ठान आदि से पूजा करने के पश्चात रंगों से होली खेली जाती है । 


पूर्व में तो आजकल की तरह रंग नहीं मिलते थे तब अधिकतर टेसू के फूलों से रंग बनाकर खेला जाता था और सचमुच वो बहुत ही खूबसूरत रंग होते थे । 

होली में सभी एक दुसरे से गले मिलकर द्वेश भावना मिटा लेते हैं ,होली में रंग खेलने के बाद होली मिलने का भी चलन है जो आजकल की भागदौड़ की जिंदगी में लगभग समाप्त होता जा रहा है पर छोटे शहरों में आज भी यह प्रथा जीवित है ,एक दुसरे से सौहार्द का त्यौहार महंगाई की मार से सूना होता जा रहा है ,अब तो बाजार भी सूनी रहने लग गयीं हैं । 

दिन वो भी क्या थे जब घरों में महकते थे पकवान और बाजार भी खिली सी रहती थीं ,दोस्तों आज तो अपनों को ही बुलाना दुश्वार हो गया है ऐसी मार मंहगाई मार रही है ॥ 


ऐसी मान्यता है कि जली हु‌ई होली की गर्म राख घर में समृद्धि लाती है। साथ ही ऐसा करने से घर में शांति और प्रेम का वातावरण निर्मित होता है।

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