Monday, October 14, 2013

पापाकुंशा एकादशी

श्री कृष्ण जी बोले --हे युधिष्ठिर आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी का नाम पापाकुंशा  एकादशी है। 

पापाकुंशा एकादशी के फलों के विषय में कहा गया है, कि हजार अश्वमेघ और सौ सूर्ययज्ञ करने के फल,इस एकादशी के फल के सोलहवें, हिस्से के बराबर भी नहीं होता है. इस एकादशी का व्रत करने से मनुष्य को स्वस्थ शरीर और सुन्दर जीवन साथी की प्राप्ति होती है.
इस एकादशी के दिन मनोवांछित फल कि प्राप्ति के लिये श्री विष्णु भगवान कि पूजा की जाती है. - See more at: http://www.myguru.in/Vrat_PoojanVidhi-%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%B6%E0%A4%BE-%E0%A4%8F%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A4%B6%E0%A5%80-Papankusha-Ekadashi.htm#sthash.aaq36xwd.dpuf
पापाकुंशा एकाद्शी
पापाकुंशा
पापाकुंशा
एकादशी तिथि के दिन सुबह उठकर स्नान आदि कार्य करने के बाद व्रत का संकल्प लेना चाहिए. 
यदि इसके व्रत में श्रद्धा और भक्ति के साथ भगवान विष्णु क पूजन किया जाए तो  मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। इसके अतिरिक्त जो व्यक्ति इस एकादशी की रात्रि में जागरण करता है,  उन्हें, बिना किसी रोक के स्वर्ग मिलता है.इस लोक में सुन्दर स्त्री ,पुत्र और धन की प्राप्ती होती है ।
इस एकादशी के एक दिन पहले भगवान राम ने रावण का वध किया था ।रावण स्वभाव से चाहे जैसा भी था लेकिन था तो ब्राम्हण ,अतः ब्रह्म हत्या के  दोष निवारण हेतु मर्यादा पुरुसोत्तम राम ने पापाकुंशा एकादशी का व्रत किया और पाप रहित हो गए।  

कथा ------

विन्ध्यपर्वत पर महा क्रुर और अत्यधिक क्रोधन नामक एक बहेलिया रहता था. उसने बुरे कार्य करने में सारा जीवन बीता दिया. जीवन के अंतिम भाग आने पर यमराज ने उसे अपने दरबार में लाने की आज्ञा दी. दूतोण ने यह बात उसे समय से पूर्व ही बता दी. मृ्त्युभय से डरकर वह अंगिरा ऋषि के आश्रम में गया. और यमलोक में जाना न पडे इसकी विनती करने लगा.
अंगिरा ऋषि ने उसे आश्चिन मास कि शुक्ल पक्ष कि एकादशी के दिन श्री विष्णु जी का पूजन करने की सलाह दी़. इस एकादशी का पूजन और व्रत करने से वह अपने सभी पापों से मुक्त होकर विष्णुलोक को गया ।।।।

              इस दिन साँवा मलीचा का सागार लिया जाना चाहिए ।

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