Friday, April 12, 2013

maa ki sankshipt upaasna

  1. देवी प्रप्न्नाति हरे प्रसीद प्रसीद मार्त जगतो अखिलस्य ,प्रसीद विश्वेश्वरी पाहि विश्वं त्वमीश्वरी चराचरस्य .
  2. सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके  ,शरण्ये त्रयम्बिके नारायणी नमोस्तुते । 
  3. देवी त्वं भक्तसुलभे सर्वकार्य विधायिनी ,कलोहि  कार्य सिद्धर्थ्य मुयाम ब्रूह यत्नतः .
  4. ॐ ज्ञानिनामपि चेतांसि देवी  भगवती हि सा , बलादा कृष्य  मोहाय महामाया प्रयक्षति । 
  5. दुर्गे स्मरता हरसि भीतिमशेष  जन्तोः ,स्वस्थे स्मरता मतिमतीव शुभां ददासि । 
  6. दारिद्य दुःख भय हारिणी का त्वन्द्या ,सर्वोपकार करनाय सदार्द चिता । शरणागत दीनार्त परित्राण परायने ,सर्व्स्यार्ति हरे नारायणी नमोस्तुते । 
  7. सर्वस्वरूपे सेर्वेषे सर्वशक्ति समन्विते ,भयेभ्यस्त्राहि नो देवी दुर्गे नमॉस्तुते । 
  8.  रोगान शेशान  पहन्सि तुष्टा ,रुष्टा तू कामान सक्लांभिशितान । त्वं आश्रीतानाम न विपिन्नरानाम ,त्व्माश्रिता ह्याश्रिता प्रयन्ति  '
  9. सर्वबाधा प्रस्मनम त्रैलोकश्य अखिलेश्वरी ,एवमेव त्वया कार्यमस्द्वैरी  .विनाशं । 
प्रतिदिन माँ दुर्गा के संक्षिप्त स्तुति सम्पूर्ण कार्य और मनोरथ पूर्ण करने वाली है । 

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